सोमवार, 7 अगस्त 2017

रक्षाबंधन का त्यौहार कब, क्यों, कैसे मनाया जाता है

नमस्कार !
हिन्दी में जानो पर आपका स्वागत है। हम आपको इस post मे रक्षाबंधन त्यौहार के बारे मे बताएँगे। इससे पहले हमने आपकोगणेश जी प्रथम पूजयते क्योंऔरहोली कब , क्यों , कैसे , कहाँ मनाई जाती हैके बारे मे बताया था। रक्षाबंधन हिंदुओं का प्रमुख त्यौहार है और यह त्यौहार पूरे भारत देश मे मनाया जाता है। यह त्यौहार भाई-बहनों का माना जाता है। इस दिन बहने अपने भाई की कलाई पर राखी बांधकर उनकी लंबी उम्र की कामना करती है और भाई अपनी बहनों को सदा रक्षा करने का वचन देते है। रक्षाबंधन का अर्थ होता है रक्षा+बंधन अर्थात किसी को अपनी रक्षा मे बांध लेना।




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कब मनाया जाता है रक्षाबंधन त्यौहार

यह त्यौहार प्रतिवर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। श्रावण (सावन) में मनाये जाने के कारण इसे श्रावणी (सावनी) या सलूनो भी कहा जाता है।

क्यों मनाया जाता है रक्षाबंधन त्यौहार

इतिहास को देखने पर रक्षाबंधन के तीन रूप नजर आते है। सर्वप्रथम रक्षा की कामना के रूप मे, युद्ध समय, व्यापार प्रतीक के लिए विदेशों मे समुद्र यात्रा पर जाने से पहले पत्नियाँ, परिवार के अन्य सदस्य, ब्राह्मण आदि पुरुष को रक्षा सूत्र बांधकर सुरक्षित लौटने की कामना करते है। इस बात की कई पौराणिक कथाएँ है जो हम आपको बता रहे है

प्रथम कथा

पुराणों के अनुसार एक बार दानवों ने देवताओं पर आक्रमण कर दिया। देवता दानवों से हारने लगे। देवराज इंद्र की पत्नी शचि देवताओं की हो रही हार से घबरा गई और इंद्र के प्राणों की रक्षा के लिए तप करना शुरू कर दिया। तप से उन्हें एक रक्षासूत्र प्राप्त हुआ। इंद्र की पत्नी शचि ने इस रक्षासूत्र को श्रावण पूर्णिमा के दिन इंद्र की कलाई पर बांध दिया, जिससे देवताओं की शक्ति बढ़ गयी और देवताओं ने दानवों पर जीत प्राप्त की।

राजा बलि की कथा

वामन पुराण की एक कथा के अनुसार भगवान विष्णु ने जब राजा बलि से तीन पग में उनका सब कुछ ले लिया था, तब राजा बलि ने भगवान विष्णु से एक वरदान मांगा कि वह भगवान विष्णु उसके साथ पाताल में निवास करे। भगवान विष्णु को वरदान के कारण पाताल मे जाना पड़ा। इससे देवी लक्ष्मी बहुत दुखी हुई। लक्ष्मी जी भगवान विष्णु को वामन से मुक्त करवाने के लिए एक दिन वृद्ध महिला का वेष बनकर पाताल पहुंची और वामन को राखी बांधकर उन्हे अपना भाई बना लिया। वामन ने जब देवी लक्ष्मी से कुछ मांगने के लिए कहा तो देवी लक्ष्मी ने वामन से भगवान विष्णु को पाताल से बैकुंठ भेजने के लिए कहा। बहन कि बात रखने के लिए वामन ने भगवान विष्णु को देवी लक्ष्मी के साथ बैकुंठ भेज दिया।

महाभारत की कथा -

महाभारत मे भगवान कृष्ण ने शिशुपाल का वध अपने चक्र से किया था। शिशुपाल का सिर काटने के बाद जब चक्र वापस भगवान कृष्ण के पास आया तो उस समय भगवान कृष्ण की उंगली कट गई, भगवान कृष्ण की उंगली से रक्त बहने लगा। यह देखकर द्रौपदी ने अपनी साड़ी का किनारा फाड़ कर भगवान कृष्ण की उंगली मे बांधा था, इसे भगवान कृष्ण ने उनकी रक्षा करने का वचन दिया। इस ऋण को चुकाने के लिए दुःशासन द्वारा चीरहरण करते समय भगवान कृष्ण ने द्रौपदी की लाज रखी।

कैसे मनाया जाता है रक्षाबंधन त्यौहार

रक्षाबंधन भाई-बहन के स्नेह का त्योहार है। पूरा दिन उल्लास और हर्षपूर्ण होता है। घरो की सफाई की जाती है। बहने सुबह स्नानादि के पश्चात पुजा की थाली सजाती है। थाली में राखी के साथ रोली या हल्दी, चावल, दीपक, मिठाई और कुछ पैसे होते है। भाई तैयार होकर टीका करवाने के लिए पूजा या किसी उपयुक्त स्थान पर बैठते है। पहले अभीष्ट देवता की पूजा की जाती है, इसके बाद रोली या हल्दी से भाई का टीका करके चावल को टीके पर लगाया जाता है और सिर पर छिड़का जाता है, भाई की आरती की जाती है और दाहिने कलाई पर राखी बांधी जाती है। भाई बहन को उपहार या धन देता है। राखी तभी प्रभावशाली बनती है जब उसे मंत्रो के साथ रक्षासूत्र बांधा जाये।

मंत्र



येन बद्धो बली राजा, दानवेन्द्रो महाबलः।
तेन त्वां प्रतिबध्नामि, रक्षे! मा चल! मा चल॥

मंत्र का अर्थ

जिस प्रकार राजा बलि ने रक्षासूत्र से बंधकर विचलित हुए बिना अपना सब कुछ दान कर दिया। उसी प्रकार हे रक्षा! आज मैं तुम्हें बांधता हूँ, तू भी अपने उद्धेश्य से विचलित हो और दृढ़ बना रहे।

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